क्वॉश : अर्थादि
पृष्ठ शीर्षभागशब्द "क्वॉश" ("Quash") एक क्रिया है। विधिक / न्यायिक संदर्भों में इसके अर्थ निम्न्लिखित हैं—
1) किसी
कानून, कार्रवाई, आरोप, आरोप क्रिया, आरोप पत्र, हुक्म, फ़ैसले, सबूत, सबपीना (अमेरिकी कानून में), रिट, निर्णय, दोषसिद्धि, आदेश, प्रक्रिया, सम्मन के प्रेषण आदि–
को ठुकराना, को अस्वीकार करना, का निरसन करना, को निरस्त करना, को रद्द करना, को खारिज करना, को दरकिनार करना, को निष्क्रिय करना, को पलट देना, को उलट देना, को हटाना, को उठाना, को मनसूख़ करना, को कलअदम करना, का उत्सादन करना, को वापस भेज देना, को मिटा देना, को काट देना, को बातिल कर देना, को मुस्तरद कर देना, का निष्प्रभावीकरण करना।[1] [2] [3] [4] [5] [6]
2) यह घोषित करना कि (किसी / कोई) विषय वस्तु (कोई पूर्व कानून, आदेश, प्रक्रिया, न्यायिक निर्णय, आधिकारिक फ़ैसला, आरोप क्रिया, रिट)–
i) को अब स्वीकार नहीं किया जाएगा;
ii) को अब सही नहीं माना जाएगा;
iii) अब वैधानिक स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी;
iv) अब से अवैध हो जाएगी। [7] [8] [9]
3) फ़ौरन और सम्पूर्णतयः कुचलना / मिटाना / नष्ट करना / निर्वापित करना / फ़ना करना / नाबूद करना। [10]
क्वॉशिंग : अर्थ
पृष्ठ शीर्षभागशब्द "क्वॉशिंग" ("Quashing") "क्वॉश" (Quash) शब्द का जेरंड (gerund) / पार्टिसिपल (participle) रूप है।
प्रयोग : भारतीय विधान में "क्वॉश" शब्द का प्रयोग जिन परिपेक्षों में किया जा सकता है, उनके उदाहरण
पृष्ठ शीर्षभाग1) किसी सम्मन के निरस्त किये जाने के सन्दर्भ में–
क्वॉश “Quash” शब्द का प्रयोग उन परिस्थितियों में किया जा सकता है, जहाँ किसी आपराधिक न्यायालय द्वारा जारी किए गए सम्मन / समन को उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया जाता है। इसका एक उदाहरण वो मामला है, जिसका शीर्षकमल्लिका शेरावत उर्फ़ रीमा लांबा बनाम महाराष्ट्र राज्य है। [11] [12]।
सामाजिक मानसिकता से ग्रस्त एक व्यक्ति ने कथित अश्लीलता के आरोप में मल्लिका शेरावत के विरुद्ध एक आपराधिक शिकायत दायर करने की ठान ली। संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन के प्रत्युत्तर में मल्लिका ने पुनरीक्षण याचिका दायर कर दी। बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति अरुण भाऊराव चौधरी ने उक्त समन को निरस्त कर दिया –और मूल शिकायतकर्ता को सलाह दी कि वह मल्लिका शेरावत के स्थान पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के विरुद्ध मुकदमा दायर करे।
2) किसी आरोप पत्र की अस्वीकृति के सन्दर्भ में– पृष्ठ शीर्षभाग
यदि यह पाया जाए कि किसी आरोपपत्र में किसी अभियुक्त के संदर्भ में (qua an accused person) त्रुटि है, तो उस आरोपपत्र को उस अभियुक्त के संबंध में (qua him / her) अस्वीकार किया जा सकता है। इस मार्ग से प्रकरण समाप्ति का वर्णन करने के लिए क्वॉश “quash” शब्द उपयुक्त है।
ऐसी ही स्थिति बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदर्श सोसाइटी घोटाले से संबंधित एक मुकदमे में उत्पन्न हुई थी। उक्त प्रकरण का शीर्षक मंदार महेश गोस्वामी बनाम पुलिस इंस्पेक्टर है। [13] [14] [15]
मज़े की बात यह है कि उसी मामले में –अर्थात् आदर्श सोसाइटी घोटाले में– मंदार गोस्वामी के अतिरिक्त दो अन्य अभियुक्तों के विरुद्ध दायर एक बाद का आरोपपत्र भी [16] [17] [18] [19] बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा आठ वर्ष बाद अस्वीकार किया गया। यह भी एक क्वॉश ही था। निर्णय तो छोड़िए, इस मामले का शीर्षक तक इंटरनेट पर –यहाँ तक कि बॉम्बे उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर भी– उपलब्ध नहीं है। वे दो सौभाग्यशाली व्यक्ति कैलाश गिडवाणी और जवाहर जगियासी थे। जगियासी भी अपने से पूर्व बरी किए गए मंदार गोस्वामी की तरह सीबीआई के लिए अधिवक्ता रह चुके थे।
3) विवाह भंग पश्चात पत्नी और पति के बीच आपराधिक विवाद को हाई कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के संदर्भ में– पृष्ठ शीर्षभाग
ऐसी स्थिति, जिसमें विवाह-विच्छेद (तलाक) के पश्चात पत्नी द्वारा पति (या पति और उसके परिवार) के विरुद्ध दायर किए गए किसी भी आपराधिक प्रकरण को खारिज किया जाता है, का वर्णन करने के लिए “क्वॉश” शब्द उपयुक्त शब्द है।। ऐसी खारिजी उच्च न्यायालय द्वारा, उक्त तलाक के बाद धारा 528 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) अथवा धारा 482 दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के अंतर्गत प्रेषित क्वॉशिंग याचिका पर करी जाती है।
यह ध्यान देने योग्य है कि उन परिस्थितियों में क्वॉशिंग याचिका प्रेषित करने की कोई आवश्यकता नहीं होती, जहाँ वैवाहिक आरोपों पर आधारित कोई प्राथमिकी दर्ज ही नहीं की गई हो। इसका कारण यह है कि कोई भी इंसान ऐसी शै को मिटा नहीं सकता, जिस शै का वजूद ही न हो।
दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा ने संबंधित पक्षों के बीच हुए विवाह-विच्छेद अनुबंध के पश्चात 30 मई 2025 को हरि किशन बनाम राज्य (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली) एवं एक अन्य [20] मामले में एक ऐफ़ आई आर को खारिज कर दिया। 20 सितम्बर 2024 को परिवार न्यायालय, साकेत, दिल्ली द्वारा आपसी सहमति से तलाक मंज़ूर किया गया था। उसके बाद पति ने उक्त ऐफ़आईआर की खारिजी हेतु धारा 528 बीएनएसएस के अधीन आवेदन प्रेषित किया था।
गौरव विपिन सिंघल और अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं एक अन्य [21] मामला हरि किशन (उपर्युक्त) के समान है। इस रिट याचिका में बॉम्बे उच्च न्यायालय की द्वि-सदस्यीय पीठ ने धारा 482 CrPC में वर्णित शक्तियों का प्रयोग किया। न्यायमूर्ति सारंग वी. कोतवाल एवं डॉ. नीला गोखले ने एक आपराधिक मुकदमे (नियमित आपराधिक वाद संख्या 258 / 2015, जो खड़की, पुणे में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित था) को, उससे उत्पन्न प्रथम सूचना रिपोर्ट (संख्या 3 / 2014, भोसरि पुलिस स्टेशन, पुणे में दर्ज) सहित खारिज कर दिया। उक्त प्राथमिकी की खारिजी हेतु याचिका श्री सिंघल द्वारा पुणे के एक परिवार न्यायालय द्वारा तलाक की डिक्री पारित किए जाने के कुछ समय पश्चात दायर की गई थी।
4) सुलह के बाद एक उच्च न्यायालय द्वारा किसी गैर वैवाहिक आपराधिक मामले की रदद्गी के सन्दर्भ में– पृष्ठ शीर्षभाग
अरुणाचल प्रदेश में दो अभियुक्तों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 332 (अर्थात् ड्यूटी पर तैनात किसी लोक सेवक को स्वेच्छा से चोट पहुँचाना) तथा धारा 34 के अंतर्गत दर्ज एक ऐफ़.आई.आर. के आधार पर आपराधिक कार्रवाई प्रारंभ की गई थी। उक्त मामले में गौहाटी उच्च न्यायालय की ईटानगर पीठ में न्यायमूर्ति कल्याण राय सुराना ने अभियुक्तों में से एक के संबंध में (qua one of the accused persons) चल रही कार्रवाई को सावन यांगफ़ो एवं एक अन्य बनाम अरुणाचल प्रदेश राज्य [22] में तब रद्द कर दिया, जब उक्त अभियुक्तों और आक्षेपकर्ता के बीच समझौता हो गया और उन्होंने कार्रवाई की रद्दगी हेतु संयुक्त रूप से आवेदन प्रेषित करने पर सहमति बना ली।
रिनचेन तमांग एवं अन्य बनाम सिक्किम राज्य [23] [24] [25] एक कहीं ज़्यादा संजीदा आपराधिक मामला था। अज्ञात संख्या की एक भीड़ –जिसके सभी सदस्य पत्थरों और टूटी हुई बोतलें से लैस थे– ने देर रात एक सुनसान जगह पर घात लगाई और तत्पश्चात पाँच निहत्थे व्यक्तियों पर ज़बरदस्त हमला कर दिया। पीड़ितों ने अपनी आपराधिक शिकायत में नौ अपराधियों की पहचान सम्मिलित करी थी। जिन धाराओं के अंतर्गत पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज की गई थी, वे थीं : धारा 341 (गलत तरीके से अवरोध के लिए दंड), धारा 147 (दंगा फ़साद करने के लिए दंड), धारा 149 (अवैध जमाव (भीड़) का प्रत्येक सदस्य समान उद्देश्य की पूर्ति में किए गए अपराध का दोषी), धारा 324 (खतरनाक हथियारों या साधनों द्वारा स्वेच्छा से चोट पहुँचाने के लिए दंड) तथा धारा 326 (खतरनाक हथियारों या साधनों द्वारा स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाने के लिए दंड)।
नौ अभियुक्तों में से सात के विरुद्ध आरोप तय किए जा चुके थे और मुकदमे की सुनवाई प्रगति पथ पर थी। तभी शिकायतकर्ताओं और अभियुक्तों ने एक समझौता-पत्र पर हस्ताक्षर किए और उक्त प्राथमिकी तथा उससे उत्पन्न आपराधिक कार्यवाही की रद्दगी के लिए उच्च न्यायालय का रुख़ किया। सिक्किम उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान ने धारा 482 दंड प्रक्रिया संहिता द्वारा प्रदत्त अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए रद्दगी का अनुरोध स्वीकार किया। उन्होंने पक्षकारों के बीच समझौता हो जाने के तथ्य को अपने निर्णय का आधार बनाया।
5) शिकायतकर्ता और आरोपित के बीच सुलह के घटक के अभाव में उच्च न्यायालय द्वारा गैर-वैवाहिक आपराधिक मामलों का निरसन किया जाने के संदर्भ में– पृष्ठ शीर्षभाग
क्वॉश शब्द का प्रयोग उस स्थिति के वर्णन के लिए किया जा सकता है, जब उच्च न्यायालय द्वारा धारा 482 दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) अथवा धारा 528 बीएनएसएस के अंतर्गत प्रेषित की गई किसी याचिका की जांच के पश्चात किसी आपराधिक शिकायत (तथा उससे संबद्ध किसी भी कार्रवाई) का निरसन किया जाए।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कर्नाटक के रामनगर ज़िले की “वृक्ष नारी” के नाम से प्रसिद्ध सालूमारदा थिमक्का द्वारा दायर एक आपराधिक शिकायत का निरसन एकमात्र अभियुक्त वासु प्रिमलाणी द्वारा धारा 482 CrPC के अंतर्गत प्रेषित याचिका पर विचार करने के पश्चात कर दिया [26] [27] [28]। शिकायतकर्ता और अभियुक्त के बीच कोई समझौता नहीं हुआ था। निरसन का आधार यह था कि आपराधिक आपेक्ष में लगाए गए सभी आरोपों को यदि प्रथम दृष्टा सत्य मान भी लिया जाता और पूर्णतः स्वीकार भी कर लिया जाता तो भी वे किसी अपराध को वर्णित नहीं करते थे। इस मामले का शीर्षक था ऋतु प्रिमलाणी उर्फ़ वासु प्रिमलाणी बनाम कर्नाटक राज्य।
जीथा संजय एवं अन्य बनाम केरल राज्य [29] इसी प्रकार का एक अन्य मामला है। केरल उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अब्दुल रहीम मुसलियार बदरुद्दीन ने धारा 482 CrPC के अंतर्गत प्रेषित याचिका की सुनवाई के बाद एक आपराधिक आक्षेप तथा उससे उत्पन्न प्राथमिकी का निरसन कर दिया। उक्त मामले में शिकायतकर्ताओं और अभियुक्तों के बीच कोई समझौता नहीं हुआ था। इस प्रकरण का निरसन इसलिए किया गया क्योंकि न्यायालय द्वारा इसे उत्पीड़क (vexatious) प्रकरण आँका गया एक दुराशय (ulterior motive) से –अर्थात् व्यक्तिगत रंजिश के कारण प्रतिशोध लेने के उद्देश्य से प्रेरित पाया गया।
6) विवाह विच्छेद वेला पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी जुड़े हुए दीवानी और फ़ौजदारी विवादों के मनसूख़ किये जाने के संदर्भ में (पक्षों के बीच सुलह हुई होने या न हुई होने के बिला लिहाज़)– पृष्ठ शीर्षभाग
क्वॉश शब्द का प्रयोग विवाह-विच्छेद वेला पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पति पत्नी के मतभेद से जुड़े हुए सभी आपराधिक एवं दीवानी मामलों को मनसूख़ किये जाने के वर्णन के लिए भी किया जा सकता है। सामान्यतः ऐसा तब किया जाता है जब पति-पत्नी आपसी सहमति स्थापित कर लेते हैं —हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय के स्तर पर किसी विवाह का विघटन किये जाने के लिए या किसी वैवाहिक विवाद से संबद्ध सभी मुआमलों के मनसूख़ किये जाने के लिए पति-पत्नी की आपसी सहमति का होना कोई अनिवार्य आवश्यकता नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में —आपसी सहमति की ही भांति— धारा 528 बीएनएसएस अथवा धारा 482 दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के अंतर्गत किसी भी याचिका का प्रेषण भी कोई लाज़मी शर्त नहीं है।
राजेश कुमार लिम्बाड़ बनाम मध्य प्रदेश राज्य [30] में सर्वोच्च न्यायालय ने एक विवाह को भंग किया और मध्य प्रदेश के विभिन्न न्यायालयों में लंबित तलाक का वाद तथा उससे संबद्ध चार अन्य मामलों को एक साथ मनसूख़ कर दिया। इस मामले में इससे पूर्व अपीलकर्ता ने अपने तथा अपने पुत्र के विरुद्ध पुत्रवधू द्वारा दायर एक आपराधिक प्रकरण के निष्प्रभावीकरण हेतु मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर पीठ में याचिका प्रेषित की थी। यद्यपि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में बीएनएसएस की धारा 528 के अंतर्गत श्री लिम्बाड द्वारा दायर याचिका [31] [32] तथा उसके पश्चात (सर्वोच्च न्यायालय में) दायर अपील एक प्रतिद्वंद्वी भाव से प्रेषित की गई थीं, तथापि सर्वोच्च न्यायालय मध्यस्थता केंद्र को उनके पुत्र बृजराज लिम्बाड और बृजराज की पत्नी अश्लेषा लिम्बाड़ के बीच समझौता करवाने में सफलता प्राप्त हुई। इसका परिणाम एक समूहगत निरस्तीकरण (mass quashing) निकला।
रेखा मिनोचा बनाम अमित शाह मिनोचा एवं अन्य [33] [34] [35] [36] में न तो पति-पत्नी के बीच आपसी सहमति का कोई तत्व था और न ही उनके बीच कोई क़रार हुआ था, फिर भी सर्वोच्च न्यायालय की द्विसदस्यीय पीठ ने बिना किसी हिचक के उनका विवाह भंग कर दिया, और साथ ही दोनों के बीच लंबित सभी दीवानी एवं आपराधिक मामलों को एक साथ मनसूख़ कर दिया।
7) फ़ौजदारी के भेष में प्रेषित किसी दीवानी विवाद के उत्सादन के सन्दर्भ में– पृष्ठ शीर्षभाग
कुसुम कनोड़िया बनाम पश्चिम बंगाल राज्य एवं एक अन्य [37] [38] को कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता द्वारा इस आधार पर उत्सादित कर दिया गया कि यह मूलतः एक दीवानी विवाद था, जिसे आपराधिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा था।
अमित डे एवं एक अन्य बनाम पश्चिम बंगाल राज्य एवं एक अन्य [39] [40] का उत्सादन भी कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इसी लिए कर दिया कि वह आपराधिक आवरण में प्रेषित एक दीवानी मुआमला था। इस निर्णय को पारित करने वाली न्यायाधीश न्यायमूर्ति शम्पा दत्त पॉल थीं।
8) किसी अधीनस्थ न्यायालय के फ़ैसले के उच्चतर न्यायालय द्वारा पलटे जाने के संदर्भ में– पृष्ठ शीर्षभाग
"क्वॉश” / "क्वॉशिंग" का प्रयोग उस समय पर भी किया जा सकता है, जब कोई उच्चतर न्यायालय किसी अधीनस्थ न्यायालय द्वारा किसी राहत के प्रदान किए जाने अथवा न किए जाने को उलट देता है।
इंदिरा गांधी हत्या कांड में बलबीर सिंह को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरी किया गया था। ऐसा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा घोषित उसकी दोषसिद्धि को पलट दिया। इस वाद का शीर्षक था केहर सिंह एवं अन्य बनाम दिल्ली प्रशासन [41] [42]।
पूर्वी पंजाब उच्च न्यायालय के न्यायमूर्तियों अछरू राम, जी. डी. खोसला तथा ए. एन. भंडारी ने नत्थूराम विनायक गोडसे एवं अन्य बनाम सम्राट (अथवा किरीट) (A.I.R. 1949 East Punjab 321, 51 Punj. L.R. 306) वाद में शंकर किस्तैया और दत्तात्रय परचुरे को बरी कर दिया था। उन्होंने लाल किले में स्थित विशेष विचारण न्यायालय के पीठासीन न्यायाधीश आत्मा चरण द्वारा दी गई उनकी दोषसिद्धियों को पलट दिया था। विचारण न्यायालय का निर्णय आप यहाँ (सम्राट (अथवा किरीट) बनाम नत्थूराम विनायक गोडसे एवं अन्य) पर [43] [44] पढ़ सकते हैं, और The Murder of the Mahatma नामक पुस्तक की प्रति यहाँ पर [45] [46] [47] पा सकते हैं। उक्त पुस्तक न्यायमूर्ति गोपाल दास खोसला (जी. डी. खोसला (ऊपर)) द्वारा लिखी गई थी।
9) किसी न्यायिक प्राधिकरण द्वारा कार्यपालिका के किसी आदेश को कलअदम किये जाने के संदर्भ में– पृष्ठ शीर्षभाग
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 26 सितम्बर 2025 को दो हैबीआस कॉर्पस रिट याचिका निर्णयों, जिनके शीर्षक क्रमशः अमीर ख़ान बनाम भारत संघ एवं अन्य [48] [49] और भोदू सेख बनाम भारत संघ एवं अन्य [50] [51] [52] थे, में छह भारतीय नागरिकों को बांग्लादेश निर्वासित करने वाले प्रशासनिक आदेशों को कलअदम कर दिया।
संदर्भ सूची :
पृष्ठ शीर्षभाग1)Quash Definition and Citations, thelawdictionary.org; स्प्रिंगफील्ड, मैसाचुसेट्स; बिना तिथि; २६ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
2)Definition of 'quash', collinsdictionary.com; ग्लासगो; बिना तिथि; २६ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
3)quash | Wex | US Law | LII / Legal Information Institute, law.cornell.edu; इथाका; बिना तिथि; २६ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
4)Quash - Oxford Reference, oxfordreference.com; ऑक्सफ़ोर्ड; २६ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
5)Legal Dictionary | Law.com, dictionary.law.com; न्यूयॉर्क; २६ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
6)quash Definition, Meaning & Usage | Justia विधिक शब्दकोष, dictionary.justia.com; माउंटेन व्यू, कैलिफ़ोर्निया; २६ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
7)QUASH | English meaning - Cambridge Dictionary, dictionary.cambridge.org; कैम्ब्रिज; २६ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
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9)Quash Definition & Meaning | Britannica Dictionary, britannica.com; शिकागो; २६ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
10)QUASH Definition & Meaning - Merriam-Webster, merriam-webster.com; स्प्रिंगफ़ील्ड, मैसाचुसेट्स; २६ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
11)मल्लिका शेरावत उर्फ़ रीमा लांबा बनाम महाराष्ट्र राज्य, आपराधिक पुनर्विचार संख्या 140 / 2015 (बॉम्बे उच्च न्यायालय, 19 अक्टूबर 2015), casemine.com; नॉएडा; बिना तिथि; २६ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
12)मल्लिका शेरावत उर्फ़ रीमा लांबा बनाम महाराष्ट्र राज्य, आपराधिक पुनर्विचार संख्या 140 / 2015 (बॉम्बे उच्च न्यायालय, 19 अक्टूबर 2015), livelaw.in; कोच्चि; 13 नवम्बर 2015; २६ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
13)मंदार महेश गोस्वामी बनाम निरीक्षक पुलिस, आपराधिक पुनर्विचार आवेदन संख्या 209 / 2013 (बॉम्बे उच्च न्यायालय, 17 मार्च 2015), casemine.com; नॉएडा; बिना तिथि; २७ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
14)HC quashes bribery case against ex-CBI counsel, dnaindia.com; मुंबई; 23 मार्च 2015; २७ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
15)HC quashes FIR against CBI lawyer in bribery case, business-standard.com; मुंबई; 22 मार्च 2015; २७ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
16)Adarsh society scam: HC discharges Kailash Gidwani, Jawahar Jagiasi, hindustantimes.com; दिल्ली; 19 मई 2023; २७ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
17)आदर्श घोटाळ्याशी संबंधित लाच प्रकरण: कैलाश गिडवानी, जवाहर जगियासी दोषमुक्त, loksatta.com; मुंबई; 20 मई 2023; २७ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
18)Adarsh Housing Society scam: HC discharges Kailash Kanhaiyalal Gidwani, Jawahar K Jagiasi in bribery case, indianexpress.com; दिल्ली; 19 मई 2023; २७ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
19)HC discharges 2 in bribery case related to Adarsh, timesofindia.indiatimes.com; दिल्ली; 20 मई 2023; २७ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
20)हरि किशन बनाम राज्य (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली) एवं एक अन्य, विविध आपराधिक वाद संख्या 2434 / २०२५ एवं विविध आपराधिक आवेदन संख्या 10884 / २०२५ (दिल्ली उच्च न्यायालय, 30 मई २०२५), delhihighcourt.nic.in; दिल्ली; बिना तिथि; २७ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
21)गौरव विपिन सिंघल और अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं एक अन्य, आपराधिक रिट याचिका संख्या 4301 / 2024 (बॉम्बे उच्च न्यायालय, 08 अक्टूबर 2024), rawlaw.in; मुंबई; बिना तिथि; २७ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
22)सावन यांगफ़ो एवं एक अन्य बनाम अरुणाचल प्रदेश राज्य, आपराधिक याचिका संख्या 10 (AP) / 2017 (गौहाटी उच्च न्यायालय, 08 मई 2017), ghcitanagar.gov.in; इटानगर; बिना तिथि; २९ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
23)रिनचेन तमांग एवं अन्य बनाम सिक्किम राज्य, आपराधिक विविध वाद संख्या 07 / 2021 (सिक्किम उच्च न्यायालय, 23 फरवरी 2022), hcs.gov.in; गंगटोक; बिना तिथि; ३० नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
24)रिनचेन तमांग एवं अन्य बनाम सिक्किम राज्य, आपराधिक विविध वाद संख्या 07 / 2021 (सिक्किम उच्च न्यायालय, 23 फरवरी 2022), casemine.com; नॉएडा; बिना तिथि; ३० नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
25)रिनचेन तमांग एवं अन्य बनाम सिक्किम राज्य, आपराधिक विविध वाद संख्या 07 / 2021 (सिक्किम उच्च न्यायालय, 23 फरवरी 2022), indiankanoon.org; बेंगलुरु; बिना तिथि; ३० नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
26)ऋतु प्रिमलाणी उर्फ़ वासु प्रिमलाणी बनाम कर्नाटक राज्य, आपराधिक याचिका संख्या 1886 / 2015 (कर्नाटक उच्च न्यायालय, 16 अक्टूबर 2015), indiankanoon.org; बेंगलुरु; बिना तिथि; 28 नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
27)ऋतु प्रिमलाणी उर्फ़ वासु प्रिमलाणी बनाम कर्नाटक राज्य, आपराधिक याचिका संख्या 1886 / 2015 (कर्नाटक उच्च न्यायालय, 16 अक्टूबर 2015), casemine.com; नॉएडा; बिना तिथि; 28 नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
28)HC quashes case against Vasu Primlani, bangaloremirror.indiatimes.com; बेंगलुरु; 19 अक्टूबर 2015; 28 नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
29)जीथा संजय एवं अन्य बनाम केरल राज्य, आपराधिक विविध वाद संख्या 2016 / 2023 (केरल उच्च न्यायालय, 18 जून 2024), hckinfo.keralacourts.in; एर्नाकुलम; बिना तिथि; 28 नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
30)राजेश कुमार लिम्बाड़ बनाम मध्य प्रदेश राज्य, आपराधिक अपील संख्या 4231 / २०२५ (सुप्रीम कोर्ट, 04 सितम्बर २०२५), sci.gov.in; नई दिल्ली; बिना तिथि; 28 नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
31)राजेश कुमार लिम्बाड़ बनाम मध्य प्रदेश राज्य, विविध आपराधिक वाद संख्या 31998 / 2023 (मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, 07 मई 2024), mphc.gov.in; इंदौर; बिना तिथि; 28 नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
32)राजेश कुमार लिम्बाड़ बनाम मध्य प्रदेश राज्य, विविध आपराधिक वाद संख्या 31998 / 2023 (मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, 07 मई 2024), latestlaws.com; नई दिल्ली; बिना तिथि; 28 नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
33)रेखा मिनोचा बनाम अमित शाह मिनोचा एवं अन्य, २०२५ INSC 1265; आपराधिक अपील संख्या 1595 / २०२५ (सुप्रीम कोर्ट, 29 अक्टूबर २०२५), indiankanoon.org; बेंगलुरु; बिना तिथि; २९ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
34)रेखा मिनोचा बनाम अमित शाह मिनोचा एवं अन्य, २०२५ INSC 1265; आपराधिक अपील संख्या 1595 / २०२५ (सुप्रीम कोर्ट, 29 अक्टूबर २०२५), lawchakra.in; गुरुग्राम; बिना तिथि; २९ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
35)रेखा मिनोचा बनाम अमित शाह मिनोचा एवं अन्य, २०२५ INSC 1265; आपराधिक अपील संख्या 1595 / २०२५ (सुप्रीम कोर्ट, 29 अक्टूबर २०२५), sci.gov.in; नई दिल्ली; बिना तिथि; २९ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
36)रेखा मिनोचा बनाम अमित शाह मिनोचा एवं अन्य वाद में कार्रवाई का अभिलेख, २०२५ INSC 1265; आपराधिक अपील संख्या 1595 / २०२५ (सुप्रीम कोर्ट, 29 अक्टूबर २०२५), sci.gov.in; नई दिल्ली; बिना तिथि; २९ नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
37)कुसुम कनोड़िया बनाम पश्चिम बंगाल राज्य एवं एक अन्य, आपराधिक पुनरीक्षण संख्या 4226 / 2023 (कलकत्ता उच्च न्यायालय, 23 फरवरी 2022), hcservices.ecourts.gov.in; दिल्ली; बिना तिथि; ३० नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
38)कुसुम कनोड़िया बनाम पश्चिम बंगाल राज्य एवं एक अन्य, आपराधिक पुनरीक्षण संख्या 4226 / 2023 (कलकत्ता उच्च न्यायालय, 23 फरवरी 2022), indiankanoon.org; बेंगलुरु; बिना तिथि; ३० नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
39)अमित डे एवं एक अन्य बनाम पश्चिम बंगाल राज्य एवं एक अन्य, आपराधिक पुनरीक्षण संख्या 1512 / 2023 (कलकत्ता उच्च न्यायालय, 07 जनवरी २०२५), hcservices.ecourts.gov.in; दिल्ली; बिना तिथि; ३० नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
40)अमित डे एवं एक अन्य बनाम पश्चिम बंगाल राज्य एवं एक अन्य, आपराधिक पुनरीक्षण संख्या 1512 / 2023 (कलकत्ता उच्च न्यायालय, 07 जनवरी २०२५), legitquest.com; नई दिल्ली; बिना तिथि; ३० नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
41)केहर सिंह एवं अन्य बनाम दिल्ली प्रशासन, 1988 AIR 1883, 1988 (3) SCC 609, (1988) 3 CRIMES 209; आपराधिक अपीलें संख्या 180 से 182 / 1987 (सुप्रीम कोर्ट, 03 अगस्त 1988), sci.gov.in; नई दिल्ली; बिना तिथि; ३० नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
42)केहर सिंह एवं अन्य बनाम दिल्ली प्रशासन, 1988 AIR 1883, 1988 (3) SCC 609, (1988) 3 CRIMES 209; आपराधिक अपीलें संख्या 180 से 182 / 1987 (सुप्रीम कोर्ट, 03 अगस्त 1988), indiankanoon.org; बेंगलुरु; बिना तिथि; ३० नवम्बर २०२५ को दृष्टिगोचर
43)नत्थूराम विनायक गोडसे एवं अन्य बनाम सम्राट (अथवा किरीट) (विशेष न्यायालय, रेड फोर्ट, दिल्ली, 10 फरवरी 1949), assettype.com; दिल्ली; बिना तिथि; 18 दिसम्बर 2025 को दृष्टिगोचर
44)नत्थूराम विनायक गोडसे एवं अन्य बनाम सम्राट (अथवा किरीट) (विशेष न्यायालय, रेड फोर्ट, दिल्ली, 10 फरवरी 1949), indianculture.gov.in; दिल्ली; बिना तिथि; 18 दिसम्बर 2025 को दृष्टिगोचर
45)Khosla, G.D.; The Murder of the Mahatma: And Other Cases from a Judge's Note-book; Chatto & Windus; London; 1963
46)Khosla, G.D.; The Murder of the Mahatma: And Other Cases from a Judge's Note-book; Jaico Press; Bombay; 1965
47)Khosla, G.D.; The Murder of the Mahatma: And Other Cases from a Judge's Note-book; mkgandhi.org; Jaico Press; Bombay; 1965
48)अमीर ख़ान बनाम भारत संघ एवं अन्य; रिट याचिका (हैबीआस कॉर्पस) संख्या 51 / 2025, सह अंतरिम आवेदन संख्या CAN 1 / 2025 (कलकत्ता उच्च न्यायालय, 26 सितम्बर 2025), sabrangindia.in; मुंबई; बिना तिथि; 18 दिसम्बर 2025 को दृष्टिगोचर
49)अमीर ख़ान बनाम भारत संघ एवं अन्य; रिट याचिका (हैबीआस कॉर्पस) संख्या 51 / 2025, सह अंतरिम आवेदन संख्या CAN 1 / 2025 (कलकत्ता उच्च न्यायालय, 26 सितम्बर 2025), indiankanoon.org; बेंगलुरु; बिना तिथि; 18 दिसम्बर 2025 को दृष्टिगोचर
50)भोदू सेख बनाम भारत संघ एवं अन्य; रिट याचिका (हैबीआस कॉर्पस) संख्या 50 / 2025, सह अंतरिम आवेदन संख्या CAN 1 / 2025 (कलकत्ता उच्च न्यायालय, 26 सितम्बर 2025), cjp.org.in; मुंबई; बिना तिथि; 18 दिसम्बर 2025 को दृष्टिगोचर
51)भोदू सेख बनाम भारत संघ एवं अन्य; रिट याचिका (हैबीआस कॉर्पस) संख्या 50 / 2025, सह अंतरिम आवेदन संख्या CAN 1 / 2025 (कलकत्ता उच्च न्यायालय, 26 सितम्बर 2025), indiankanoon.org; बेंगलुरु; बिना तिथि; 18 दिसम्बर 2025 को दृष्टिगोचर
52)भोदू सेख बनाम भारत संघ एवं अन्य; रिट याचिका (हैबीआस कॉर्पस) संख्या 50 / 2025, सह अंतरिम आवेदन संख्या CAN 1 / 2025 (कलकत्ता उच्च न्यायालय, 26 सितम्बर 2025), indiankanoon.org; बेंगलुरु; बिना तिथि; 18 दिसम्बर 2025 को दृष्टिगोचर