एक सास जिसने अपनी बहू और उसके समूचे जन्मजात परिवार पर घरेलू हिंसा मुकद्दमा दायर कर दिया

A Mother-in-law who filed a DV Case against her Daughter-in-law and her Whole Natal Family
 पिछला लेख अगला लेख 

बोब्बिली संतोष और पीठला संतोषी उर्फ़ भवानी का विवाह 7 अप्रैल 2022 को हुआ था। यह एक व्यवस्थित विवाह (अरेंज्ड मैरिज) था और दोनों आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के रहने वाले थे।

उनकी शृङ्गार रात्रि बोब्बिली संतोष के घर पर बिताई जानी थी, जहाँ वे अपने माता-पिता, एक छोटे भाई और एक छोटी बहन के साथ रहते हैं। उनके छोटे भाई-बहन अविवाहित हैं।

प्रथमा रात्रि तेलुगु संस्कृति में विवाह समारोह का एक अवियोज्य अंग है, और आंध्र प्रदेश में इसे एक औपचारिक समारोह का दर्जा दिया गया है, नामतः "प्रथमा रात्रि समारोह"।

संतोष के परिवार के अनुसार पीठला संतोषी ने उस पहली रात को अपने पति के साथ शब-ए-ज़फ़ाफ़ की रस्म में हिस्सा लेने के बजाय एक हंगामा खड़ा कर दिया। वो आधी रात को शयन कक्ष से बाहर निकल आई और चिल्ला चिल्ला के बोलने लगी कि बोब्बिली संतोष मर्द नहीं है।

शादियाँ खुशी मनाने का अवसर होती हैं, और सुहाग रात को प्रेम की रात माना जाता है। कुछ जोड़े सहवास शुरू करने के बजाय अपनी पहली रात को एक-दूसरे को जानना शुरू करना पसंद करते हैं, लेकिन यह रात इस के बावजूद उनके लिए एक सुखद रात होती है। यह सत्य है कि कभी-कभी ऐसे विवाह-संबंधों के बारे में सुनने को मिलता है जिनकी शुरुआत अशुभ रही, लेकिन बोब्बिली संतोष के जीवन में (उनकी सुहाग रात को) जो हुआ, वो अभूतपूर्व था। यह कहना उचित ही होगा कि उनका विवाह-सम्बन्ध आरंभ में ही ध्वस्त हो गया।

संतोषी उस रात के बाद शांत नहीं हुई। उसने श्री बोब्बिली और उनके परिवार के लिए ज़िंदगी को मुश्किल बनाए रखा। उसके लिए उन पर चिल्लाना और साथ-साथ –उन्हें यह धमकी देते हुए कि वह अपने साथ हो रहे दुर्व्यवहार का वीडियो बना कर सबूत जुटा रही है– अपने मोबाइल फ़ोन से वीडियो फ़िल्में बनाना आम बात थी। अक्सर वो उनके फ़्लैट के बाहर के खुले जीने की एक खुली लैंडिंग पर चढ़ जाती थी और उनके पड़ोसियों को चिल्लाकर बोलती थी कि वे भयानक लोग हैं। उसे अपने पति और उसके परिवार के सदस्यों पर अपने ही हमलों को रिकॉर्ड करने की आदत भी थी।

वो बहुत लंबे गुस्से करती थी, जिनसे उसके पति, उसके माता-पिता और भाई-बहन के मनों में तनाव पैदा हो जाता था। और वो एक दिन में गुस्से के एक दौरे से संतुष्ट नहीं होती थी, और दिन और रात भर अपने आरोपों और अपमानों को दोहराती रहती थी। उसकी निरंतर आक्रामकता पिछले दिन के खत्म होने से पहले ही अगले दिन का सत्यानाश कर देती थी।

उसके पति के बुज़ुर्ग माता-पिता शारीरिक रूप से इतने कमज़ोर थे कि उनमें निरंतर तनाव बर्दाश्त करने की शक्ति नहीं थी। वे उच्च रक्तचाप, गुर्दे की बीमारी, माइग्रेन के सिरदर्द, मधुमेह और यकृत रोग से पीड़ित होने लगे। उनके तंत्रिका और हृदय संबंधित स्वास्थ्य में गिरावट आ गई। उनकी बहू को उनकी हालत पर किसी भी चरण पर तरस नहीं आया और उसने अपना नृशंस व्यवहार कभी नहीं रोका।

इस सब के अलावा उसकी माँ और बहन उस से मिलने आया करती थीं और उसके ससुराल वालों को गालियाँ और धमकियाँ दिया करती थीं।

उनके पड़ोसियों ने इन लगातार हो रहे कांडों को देखा और उनके माता-पिता को पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी। उन्होंने अपने पड़ोसियों की सलाह को माना और कुछएक बार पुलिस को बुलाया, लेकिन उन्होंने अपने बेटे की पत्नी के खिलाफ़ कोई आपराधिक शिकायत दर्ज़ नहीं करवाई।

आखिरकार उनका धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने पीठला संतोषी के विरुद्ध एक आक्षेप प्रेषित कर दिया। पुलिस वाले उनके घर आए और उन्होंने संतोषी को चेतावनी दी कि यदि उसने शांति भंग करना बंद नहीं किया, तो वे क्षेत्रीय कार्यकारी मजिस्ट्रेट के कार्यालय में उसके विरुद्ध बाध्यकरण आदेश हेतु आवेदन प्रेषित करेंगे। (बाध्यकरण [1] [2] [3] [4] [5] [6] एक निषेधाज्ञा होता है जो किसी व्यक्ति को शांति भंग करने की अवस्था में अनिवार्य कारावास या जुर्माना हो जाने के बूते पर शांति बनाए रखने के लिए बाध्य करता है।) पीठला संतोषी ने उसी दिन अपना वैवाहिक गृह छोड़ दिया और वो अपनी माँ और बहन के पास वापस चली गई। यह उनकी शादी की तारीख से लगभग एक साल बाद की बात है।

अपने वैवाहिक घर को छोड़ने के तुरंत बाद पीठला संतोषी ने अपने पति, उनके बुज़ुर्ग माता-पिता और उनके मासूम सहोदर-सहोदरी के खिलाफ़ एक आपराधिक आपेक्ष दर्ज़ करवाया, और उस में उन पर(!) अपने साथ(!) क्रूरतापूर्ण बर्ताव करने का आरोप लगाया। उसने जिन कानूनी प्रावधानों को आह्वानित किया, वे आईपीसी की घिसी-पिटी धाराएँ 498a, 406 और 34, और दहेज निषेध अधिनियम की उतनी ही घिसी-पिटी धाराएँ 3 और 4 थीं। उसने दिशा पुलिस स्टेशन विशाखापत्तनम में प्रकरण दर्ज़ करवाया। इसे विशाखापत्तनम में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा महिला पुलिस स्टेशन बनाम बोब्बिली संतोष एवं अन्य [7] शीर्षक के तहत सुना जा रहा है।

बोब्बिली संतोष की बहन ने इस लेखक से कानूनी विमर्श लिया, और उसे अपने भाई से विवाह-विच्छेद हेतु मुकदमा दायर करने और अपनी माता से घरेलू हिंसा का मुकदमा दायर करने के लिए कहने को कहा गया।

इसके बाद संतोष ने भी मई 2023 में एक मुकदमा दायर कर दिया, जो क्रूरता के आधार पर पीठला संतोषी के खिलाफ़ तलाक़ का मुकदमा था। इसे विशाखापत्तनम में परिवार न्यायालय द्वारा बोब्बिली संतोष बनाम बोब्बिली पीठला संतोषी [8] शीर्षक के तहत सुना जा रहा है।

संतोष की माताजी बोब्बिली वेंकटा लक्ष्मी ने अगस्त 2024 में पीठला संतोषी, उसकी बहन पीठला संध्या, और उनकी माँ पीठला सरोजिनी के विरुद्ध घरेलू हिंसा का एक आक्षेप दर्ज़ करवाया। यह पीठला संतोषी द्वारा उनके पूरे परिवार पर दायर किए गए बेतुके कष्टप्रद दहेज़ प्रकरण का एक बेहतरीन प्रतिकार था। इस मामले को गजुवाका, विशाखापत्तनम में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा बोब्बिली वेंकटा लक्ष्मी बनाम बोब्बिली (पीठला) संतोषी उर्फ़ भवानी एवं अन्य [9] शीर्षक के तहत सुना जा रहा है।

भारत में घरेलू हिंसा आक्षेप आमतौर पर बहुओं द्वारा दर्ज़ करवाए जाते हैं। बोब्बिली वेंकटा लक्ष्मी का घरेलू हिंसा मुकद्दमा इसका उल्टा है। साथ में ये भी कहना चाहिए की ये एक बेहद संतोषजनक उलटफेर है।

इस लेख के प्रकाशन की तिथि तक उक्त मुकदमेबाज़ी चल रही है।

संदर्भ सूची :

पृष्ठ शीर्षभाग  

1)Bharatiya Nagrik Suraksha Sanhita (BNSS), Section 126, thebharatiyanyayasanhita.in; New Delhi; Undated; Retrieved on 31st October 2025

2)Criminal Procedure Code (CrPC), Section 107, devgan.in; New Delhi; Undated; Retrieved on 31st October 2025

3)Magistrates’ Courts Act (United Kingdom) 1980, Section 115, legislation.gov.uk; London; Undated; Retrieved on 28th October 2025

4)Powers of Criminal Courts (Sentencing) Act (United Kingdom) 2000, Section 150, legislation.gov.uk; London; Undated; Retrieved on 28th October 2025

5)What does Binding over mean? | Legal Choices dictionary, legalchoices.org.uk; London; Undated; Retrieved on 28th October 2025

6)Binding Over | Youth Justice Legal Centre, yjlc.uk; London; Undated; Retrieved on 28th October 2025

7)महिला पुलिस स्टेशन बनाम बोब्बिली संतोष एवं अन्य, CC संख्या 9271 / 2023, न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत, विशाखापत्तनम, CNR संख्या APVS030092712023

8)बोब्बिली संतोष बनाम बोब्बिली पीठला संतोषी, FCOP संख्या 984 / 2023, पारिवारिक न्यायालय, विशाखापत्तनम, CNR संख्या APFCVS0009842023

9)बोब्बिली वेंकटा लक्ष्मी बनाम बोब्बिली (पीठला) संतोषी उर्फ़ भवानी एवं अन्य, DVC संख्या 309 / 2024, न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत, गजुवाका, जिला विशाखापत्तनम, CNR संख्या APVS0D0003102024






द्वारा लिखित
मनीष उदार द्वारा प्रकाशित।

पृष्ठ को बनाया गया
अंतिम अद्यतन ०८ नवम्बर २०२५ को किया गया