ऐफ़ आई आर में कुछ न्यूनतम तथ्यों का मौजूद होना आवश्यक है
पृष्ठ शीर्षभागहालांकि किसी प्राथमिकी को एक अपराध का विश्वकोश होने की आवश्यकता नहीं है, फिर भी यह आवश्यक है कि इसमें तथ्यों की एक आवश्यक न्यूनतम मात्रा का उल्लेख किया जाए। इस दृष्टिकोण का सुप्रीम कोर्ट ने भी कुछ निर्णयों में पक्ष-प्रचार किया है (नीचे देखें)।
सर्वोच्च न्यायालय निर्णय जिन में घोषित किया गया है कि एफ.आई.आर. में कुछ न्यूनतम तथ्यों का विद्यमान होना आवश्यक है
पृष्ठ शीर्षभागसर्वोच्च न्यायालय के दो निर्णयों जिन में यह उल्लेख किया गया है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में कुछ न्यूनतम तथ्य आवश्यक हैं की ढाँचा मात्र रूपरेखाएँ यहां [18][19] प्रस्तुत हैं।
आंध्र प्रदेश राज्य बनाम गोलकोंडा लिंगा स्वामी
पृष्ठ शीर्षभागआंध्र प्रदेश राज्य बनाम गोलकोंडा लिंगा स्वामी का प्रासंगिक भाग निम्नलिखित है।
सर्वोच्च न्यायालय
समतुल्य उद्धरण: (2004) 6 SCC 522;
आंध्र प्रदेश राज्य बनाम गोलकोंडा लिंगा स्वामी
निर्णय तिथि: 27/07/2004
भारत के सर्वोच्च न्यायालय की एक खंडपीठ द्वारा निर्णीत
वरियावा, एस.एन. (J)
पसायत, ए. (J)
निर्धारित हुआ (निर्णय के 11वें अनुच्छेद में):
"...हालांकि प्रथम सूचना रिपोर्ट का उद्देश्य पृष्ठभूमि परिदृश्य का विश्वकोश होना नहीं होता है, फिर भी ढाँचा मात्र लक्षणों में भी किसी अपराध के हुए जाने का खुलासा होना ज़रूरी होता है। इन प्रकरणों में स्थिति ऐसी नहीं है। इसलिए, उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप किसी भी कानूनी दोष से ग्रस्त नहीं है, हालांकि उच्च न्यायालय द्वारा इंगित तर्कों को हमारा अनुमोदन प्राप्त नहीं है।"
अरुलवेलु एवं एक अन्य बनाम जन अभियोजक द्वारा राज्य प्रतिनिधित्व एवं एक अन्य
पृष्ठ शीर्षभागअरुलवेलु एवं एक अन्य बनाम जन अभियोजक द्वारा राज्य प्रतिनिधित्व एवं एक अन्य में फ़ैसला दलवीर भंडारी ने लिखा था। नीचे जो अंश उद्धरित किया गया है उसके अलावा निष्कर्ष में यह कहा गया था कि जब दो विचार संभव हैं, तो आरोपी के पक्ष में जो विचार होता है वो स्वीकार्यता योग्य है।
सर्वोच्च न्यायालय
समतुल्य उद्धरण: (2009) 10 SCC 206;
अरुलवेलु एवं एक अन्य बनाम जन अभियोजक द्वारा राज्य प्रतिनिधित्व एवं एक अन्य
निर्णय की तिथि: 07/10/2009
भारत के सर्वोच्च न्यायालय की एक खंडपीठ द्वारा निर्णीत
भंडारी, डी. (J)
चौहान, बी.एस. (J)
निर्धारित हुआ (निर्णय के 16वें अनुच्छेद में):
"उच्च न्यायालय ने टिप्पणी करी कि प्राथमिकी प्रकरण के इतिहास के सभी विवरणों को समाहित करने वाला विश्वकोश नहीं हो सकता। उच्च न्यायालय का यह रवैय्या सही नहीं दीखता है। प्रथम सूचना रिपोर्ट में कम से कम अभियोजन पक्ष की मोटी-मोटी कहानी का उल्लेख होना चाहिए और महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख न करने से प्राथमिकी की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।"
संदर्भ सूची :
पृष्ठ शीर्षभाग18)State of Andhra Pradesh vs Golconda Linga Swamy And Another on 27 July, 2004; Indiankanoon.org; Delhi; Undated; Retrieved on 15th May 2021
19)Arulvelu & Another vs State Represented By Public Prosecutor & Another on 7 October, 2009; Indiankanoon.org; Delhi; Undated; Retrieved on 15th May 2021